June 28, 2026
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का निधन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का निधन
चंडीगढ़/हांसी : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का रविवार तड़के गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से न्यायपालिका, अधिवक्ता समुदाय तथा पूरे हरियाणा में शोक की लहर दौड़ गई। वे 59 वर्ष के थे। अपने पीछे वे पत्नी समता सिंधु, पुत्र समृद्ध तथा पुत्री समृद्धि सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मसूदपुर (जिला हांसी) में आज रविवार को दोपहर बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके आकस्मिक निधन का समाचार मिलते ही न्यायिक जगत, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा क्षेत्र के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
*साधारण किसान परिवार से न्यायपालिका के शिखर तक का प्रेरणादायी सफर*
जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का जन्म 4 अप्रैल 1967 को हरियाणा के तत्कालीन हिसार (वर्तमान हांसी) जिले के गांव मसूदपुर में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के राजकीय उच्च विद्यालय से प्राप्त की तथा दसवीं तक की पढ़ाई वहीं पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर उच्च शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1992 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
इसके बाद उन्होंने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एवं हरियाणा में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दीवानी, आपराधिक, संवैधानिक तथा सेवा संबंधी मामलों की सफलतापूर्वक पैरवी की। वे अपने परिवार के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने वकालत के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी प्रतिभा के दम पर देश की प्रतिष्ठित न्यायपालिका में विशिष्ट पहचान बनाई।
*महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर निभाई जिम्मेदारियां*
अपने लंबे विधिक जीवन के दौरान उन्होंने हरियाणा लोक सेवा आयोग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी, सहकारी बैंक, बीएसएनएल सहित अनेक सरकारी संस्थानों और निकायों का प्रतिनिधित्व किया।
वर्ष 1999 में उन्हें भारत सरकार का अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया। इसके बाद वे वर्ष 2000 में चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता बने। वर्ष 2004 से 2008 तक हरियाणा सरकार के उप महाधिवक्ता रहे। सितंबर 2008 में पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त हुए और बाद में दिसंबर 2009 में हरियाणा सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता का दायित्व संभाला। वर्ष 2013 में इस पद से त्यागपत्र देकर उन्होंने पुनः निजी वकालत शुरू की।
वर्ष 2016 में उन्हें पंजाब, हरियाणा एवं चंडीगढ़ के उच्च एवं अधीनस्थ न्यायालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं के पैनल में शामिल किया गया। वे इंटरनेशनल लॉ एसोसिएशन (इंडिया) के सदस्य भी रहे तथा विभिन्न सामाजिक एवं जनसेवी संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
*हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में दी उल्लेखनीय सेवाएं*
10 जुलाई 2017 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 3 दिसंबर 2018 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। अपनी निष्पक्षता, गहन कानूनी समझ और सरल स्वभाव के कारण वे न्यायिक जगत में अत्यंत सम्मानित थे। वर्तमान में वे हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल थे और वर्ष 2029 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
*गांव और समाज से हमेशा जुड़े रहे*
जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का अपने पैतृक गांव मसूदपुर से विशेष लगाव था। व्यस्त न्यायिक जीवन के बावजूद वे समय-समय पर गांव आते थे और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भाग लेते थे। जिस राजकीय विद्यालय से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की, वहां भी वे नियमित रूप से पहुंचते थे। विद्यालय में शिक्षा का स्तर बेहतर हो, विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं मिलें तथा ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे आगे बढ़ें, इसके लिए वे सदैव प्रयासरत रहते थे। उन्होंने गांव के विकास और सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
*युवा पीढ़ी के लिए बने प्रेरणा स्रोत*
एक साधारण किसान परिवार से निकलकर देश की प्रतिष्ठित न्यायपालिका में वरिष्ठ न्यायाधीश बनने तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि कठिन परिश्रम, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी व्यक्ति जीवन की सर्वोच्च उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उनका निधन केवल न्यायपालिका ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा और विशेष रूप से उनके पैतृक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु को उनकी उत्कृष्ट न्यायिक सेवाओं, सादगी, विनम्रता, सामाजिक सरोकारों और न्याय के प्रति अटूट समर्पण के लिए हमेशा श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।