हिन्दी भाषा को युवा पीढ़ी की रचनात्मक अभिव्यक्ति का स्वर बनाना जरूरी : मंजू मानव
हिन्दी भाषा को युवा पीढ़ी की रचनात्मक अभिव्यक्ति का स्वर बनाना जरूरी : मंजू मानव
हिन्दू कन्या महाविद्यालय में ‘हिन्दी चेतना : युवा स्वर’ कार्यक्रम का आयोजन, भाषण व कविता प्रतियोगिता में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभाजींद : हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जींद इकाई के तत्वावधान में हिन्दू कन्या महाविद्यालय, जींद में ‘हिन्दी चेतना : युवा स्वर’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम मोर ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में हिन्दी भाषा के प्रति अनुराग, अभिव्यक्ति की क्षमता तथा सृजनात्मक चेतना को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर भाषण एवं कविता प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और समकालीन जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और प्रभावशाली अभिव्यक्ति के माध्यम से हिन्दी के प्रति अपने लगाव को भी प्रदर्शित किया।प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा के साथ जुड़ने के साथ-साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा को मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जींद इकाई की अध्यक्ष मंजू मानव ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी स्मृति, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत धारा है। उन्होंने कहा कि जब युवा पीढ़ी हिन्दी को अपने विचार और सृजन का स्वर बनाती है, तभी हिन्दी का वास्तविक उत्सव सार्थक होता है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम मोर ने छात्राओं की रचनात्मक सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा उसके निरंतर प्रयोग, अध्ययन और सृजन से समृद्ध होती है। उन्होंने छात्राओं को हिन्दी के प्रति आत्मीयता और गौरव का भाव बनाए रखते हुए अपनी मौलिक अभिव्यक्ति को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।परिषद की कोषाध्यक्ष हिमानी गुप्ता ने हिन्दी भाषा को नई पीढ़ी की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में भाषा और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में परिषद के अन्य सदस्यों ने भी हिन्दी दिवस के महत्व और हिन्दी भाषा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को लेकर अपने विचार साझा किए तथा छात्राओं को साहित्य और भाषा से निरंतर जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का सुसंगठित एवं प्रभावपूर्ण मंच-संचालन परिषद की महामंत्री एवं संगीत विभाग की अध्यक्षा डॉ. क्यूटी साहा ने किया। अपने सहज संवाद, विषयानुकूल साहित्यिक टिप्पणियों और सुमधुर स्वर से उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न कड़ियों को आकर्षक ढंग से जोड़ा। उनके संगीतमय अंदाज और प्रभावी संचालन ने कार्यक्रम के वातावरण को आत्मीय और जीवंत बना दिया।
डॉ. क्यूटी साहा ने प्रतिभागी छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रतिभा और अभिव्यक्ति में मौजूद संभावनाओं को रेखांकित किया। उनके संचालन ने कार्यक्रम को केवल औपचारिक मंच-संचालन तक सीमित न रखते हुए साहित्य और संगीत के सुंदर समन्वय का रूप दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने छात्राओं की सहभागिता और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि हिन्दी दिवस जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।