February 03, 2026
जानलेवा हमला व सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में दो दोषियों को 5-5 वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक पर 19-19 हजार रुपये जुर्माना
जानलेवा हमला व सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में दो दोषियों को 5-5 वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक पर 19-19 हजार रुपये जुर्माना
जींद : जींद पुलिस की प्रभावी पैरवी व ठोस साक्ष्यो के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायालय, जींद माननीय श्रीमती नेहा नोहरिया कि अदालत ने पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने व सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में दो दोषी सिया नैन वासी गांव धरोदी व मंजीत उर्फ काला वासी गुरुसर को 5-5 वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक को 19-19 हजार रुपये जुर्माना कि सजा सुनाई । 03-02-2026
पुलिस प्रवक्ता राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना सदर नरवाना में दर्ज मु. नं. 430 दिनांक 20.11.2021 धारा 332, 353, 307, 186 भा.द.स. तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 25-27/54/59 के तहत दर्ज मामले में सामने आया कि पुलिस पार्टी को सुचना मिला कि मंजीत उर्फ काला वासी गुरुसर व सिया नैन वासी धरोदी जिन्होने हरदीप उर्फ जङेजा वासी धरोदी कि गोलिया मारकर हत्या कि थी । जो ढाकल (सिरसा ब्रांच ) के सिचांई विभाग के स्टोर में छिपे हुए है । जिनकी सुचना मिलने पर पुलिस टीम ने उन्हे पकङे कि कोशिश कि तो उन्होने पुलिस पार्टी पर भी अपने पास लिए हुए असला से फायर कर दिया जिसमें पुलिस पार्टी बाल-बाल बच गई थी तथा दोषियों को असला सहित गिरफ्तार कर लिया था ।
जींद पुलिस कि प्रभावी पैरवी व ठोस साक्ष्यो के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायालय, जींद की माननीय न्यायाधीश श्रीमती नेहा नोहरिया कि अदालत ने आरोपी सिया नैन व मंजीत उर्फ काला को दोषी ठहराते हुए धारा 307/34 IPC के तहत 05 वर्ष का कठोर कारावास व ₹15,000/- जुर्माना, धारा 353/34 IPC के तहत 01 वर्ष का कठोर कारावास व ₹1,000/- जुर्माना तथा धारा 25 शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत 03 वर्ष का कठोर कारावास व ₹3,000/- जुर्माना कि सजा सुनाई तथा जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कठोर कारावास कि सजा सुनाई ।
यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि कानून व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करने, सरकारी कार्य में अवरोध डालने एवं जानलेवा हमला करने जैसे गंभीर अपराधों के प्रति न्यायालय सख्त दृष्टिकोण अपनाए हुए है। जिला पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान प्रस्तुत सशक्त साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से दोष सिद्धि सुनिश्चित हुई है।