Friday, February 6, 2026
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₹25,000 तत्काल (Urgent) शुल्क लेने के बावजूद एनआरआई महिला का GPA पंजीकृत नहीं हुआ
₹25,000 तत्काल (Urgent) शुल्क लेने के बावजूद एनआरआई महिला का GPA पंजीकृत नहीं हुआ
अन्ना टीम जींद का बड़ा सवाल – जब हड़ताल तय थी, तो नागरिकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं?
उपायुक्त से बैठक, लेकिन कोई समाधान नहीं- आखिर जिले में समस्या के समाधान के लिए जिम्मेवार कौन ?
अन्ना टीम की मुख्यमंत्री से मांग – तकनीकी युग में एनआरआई के लिए ऑनलाइन मीटिंग व डिजिटल सत्यापन से GPA व अन्य दस्तावेज पंजीकरण की विशेष सुविधा शुरू होजींद: अमेरिका में रह रही एनआरआई महिला रीतू ढांडा का जींद में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) आज तक पंजीकृत नहीं हो पाया, जबकि उन्होंने सभी दस्तावेज पूरे कर लिए थे और तत्काल (Urgent) विशेष टोकन लेकर ₹25,000/- (नॉन-रिफंडेबल) शुल्क भी जमा किया था। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे जिले और राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बन गया है।रीतू ढांडा 29 जनवरी 2026 को भारत आई थीं और 9 फरवरी 2026 की सुबह उनकी अमेरिका वापसी निर्धारित है। उनका उद्देश्य केवल अपने पारिवारिक एवं पैतृक मामलों के लिए जिंद में GPA पंजीकृत कराना था, ताकि भविष्य में बार-बार भारत आने की विवशता न रहे।
यह GPA उनके पिता स्वर्गीय Prem Parkash Singh के निधन के बाद आवश्यक हो गया है।
स्वर्गीय प्रेम प्रकाश सिंह जींद के प्रतिष्ठित Government College Jind में भूगोल (Geography) विषय के जाने-माने प्रोफेसर रहे तथा वहीं से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका निधन 7 जून 2011 को हुआ था। शिक्षा जगत में उनके योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। बुधवार से शुक्रवार तक – केवल आश्वासन, कोई जिम्मेदारी नहीं
पीड़िता के अनुसार—
बुधवार तक उनका सामान्य (General) टोकन स्वीकृत ही नहीं किया गया।
गुरुवार को कार्यालय पहुंचने पर बताया गया कि “आज एक दिन की हड़ताल है।” उसी समय अधिकारियों/कर्मचारियों ने यह भरोसा दिलाया कि— “आप शुक्रवार को तत्काल (Urgent) टोकन ले लीजिए, शुक्रवार को ही आपका GPA पंजीकृत कर दिया जाएगा।”इस भरोसे पर रीतू ढांडा ने शुक्रवार को तत्काल विशेष टोकन लिया और ₹25,000/- शुल्क जमा किया।
शुक्रवार को वह पूरे दस्तावेजों के साथ कार्यालय पहुंचीं, लगातार अधिकारिओ से निवेदन करती रहीं, लेकिन—
- किसी अधिकारी ने फाइल लेने या प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं ली,
- आखिर स्पष्ट किया गया कि आज भी हड़ताल है और अंततः उनका GPA पंजीकृत नहीं किया गया।
इसके बाद अगले दो दिन अवकाश (नॉन-वर्किंग डे) होने से अब उनके भारत प्रवास में काम होने की कोई संभावना नहीं बची।
टोकन विवरण
सामान्य (General) टोकन नंबर :
IN_JIN_JIN_999803180108697
तत्काल (Urgent) विशेष टोकन नंबर :
JIN_JIN_JIN_999806102811523अमेरिका में बना वैध GPA भी जींद में हुआ अस्वीकार
रीतू ढांडा ने बताया कि उन्होंने पहले ही अमेरिका में अपने काउंसलर के माध्यम से विधिवत GPA तैयार कराया था और उसे भारत भेजा था। वह GPA अपनी तिथि के अनुसार वैध था, लेकिन जींद प्रशासन ने यह कहकर उसे पंजीकरण/सत्यापन के लिए स्वीकार नहीं किया कि वह भारत में देर से प्रस्तुत किया गया है।
पीड़िता का कहना है कि GPA की वैधता निर्माण/निष्पादन की तिथि से होती है, न कि प्रस्तुत करने की तिथि से—फिर भी कोई वैकल्पिक समाधान नहीं दिया गया।अन्ना टीम जींद ने कि उपायुक्त से मुलाकात
इस पूरे मामले में सामाजिक संगठन अन्ना टीम जींद खुलकर पीड़िता के समर्थन में सामने आया। टीम के प्रतिनिधियों ने रीतू ढांडा तथा अन्य प्रभावित नागरिकों के साथ उपायुक्त कार्यालय में बैठक कर पूरा घटनाक्रम रखा और पूछा—
- जब हड़ताल की स्थिति पहले से थी, तो नागरिकों से टाटकाल शुल्क लेकर टोकन जारी क्यों किए गए?
- हड़ताल के दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था (विशेष काउंटर/अधिकृत अधिकारी/विशेष कैंप) क्यों नहीं बनाई गई?अन्ना टीम जींद के संयोजक हितेश हिन्दुस्तानी ने कहा—
“यह केवल एक महिला का मामला नहीं है, यह जींद की व्यवस्था का आईना है। बुधवार से शुक्रवार तक सिर्फ आश्वासन दिए गए। गुरुवार को कहा गया— आज हड़ताल है; कल शुक्रवार को तत्काल टोकन लेकर आ जाइए, उसी दिन पंजीकरण हो जाएगा। लेकिन ₹25,000 लेने के बाद भी न कोई अधिकारी जिम्मेदारी लेता है, न लिखित जवाब देता है और न काम करता है।
यह केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि हरियाणा की राजनीतिक व्यवस्था की भी विफलता है। सरकार को बताना चाहिए कि जब पूरे प्रदेश में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल होती है, तब आम नागरिकों के जरूरी कानूनी काम कैसे होंगे।” आखिर कौन बनाएगा वैकल्पिक व्ययवस्था ? लगता है प्रदेश का प्रसाशन प्रदेश सरकार के काबू नहीं आ रहा है पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने माना बुरा हाल है सिस्टम का, सुधारने के नाम पर शरू कि गई अधूरी ऑनलाइन व्यवस्था ?हिन्दुस्तानी ने कहा कि—
“यह जींद का मामला केवल एक उदाहरण है। पूरे हरियाणा में हजारों नागरिक ऐसे हैं, जिनके GPA, रजिस्ट्री, नामांतरण और विरासत जैसे जरूरी काम दो दिन की हड़ताल के कारण रुके पड़े हैं और राज्य व जिला प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक समाधान नहीं है।”
तकनीकी युग में भी एनआरआई के लिए कोई डिजिटल सुविधा नहीं आखिर क्यों ? क्यों कि उसको विदेश से ऑनलाइन वेरीफिकेशन कि जा सकती ?
अन्ना टीम जींद ने इस प्रकरण के माध्यम से एक बड़ा सवाल उठाया है कि—
आज जब भारत डिजिटल इंडिया की बात करता है, तब भी एनआरआई नागरिकों के लिए—
- GPA जैसे जरूरी दस्तावेजों के पंजीकरण हेतु
- ऑनलाइन वीडियो मीटिंग के माध्यम से उपस्थिति,
- डिजिटल पहचान सत्यापन,
- तथा वरिष्ठ अधिकारी द्वारा ऑनलाइन प्रमाणीकरण
जैसी सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं हैं?
टीम का कहना है कि यदि अदालतों, बैंकिंग और कई सरकारी सेवाओं में ऑनलाइन सत्यापन संभव है, तो एनआरआई नागरिकों के लिए GPA एवं अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण हेतु सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा सकती?
अन्ना जींद ने मांग की है कि—- एनआरआई नागरिकों के लिए एक विशेष ऑनलाइन सुविधा प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें
- वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पक्षकार की पहचान,
- पासपोर्ट व बायोमैट्रिक आधारित डिजिटल सत्यापन,
- तथा स्थानीय सब-रजिस्ट्रार/वरिष्ठ अधिकारी द्वारा ऑनलाइन प्रमाणीकरण
की व्यवस्था हो। - ऐसे मामलों में आवेदक को कार्यालय आना ही न पड़े या आवश्यकता पड़ने पर पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जा सके और यदि कार्यालय आना हो तो न्यायिक मजिस्ट्रेट कि तरह दिन व रात किसी अधिकारी कि जिम्मेदारी निर्धारित होनी चाहिए ।
अन्ना टीम जींद का कहना है कि इससे न केवल एनआरआई नागरिकों के साथ आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि कार्यालयों में भीड़, दलाली और अनावश्यक देरी पर भी रोक लगेगी।
न सेवा मिली, न रिफंड — पेनल्टी सहित वापसी की मांग
अन्ना टीम जींद मुख्यमंत्री को ईमेल भेज कर मांग कि है कि —
- जब विभागीय हड़ताल और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण कार्य नहीं हो पाया और आवेदक की ओर से कोई त्रुटि नहीं थी,
तो ₹25,000/- तत्काल (Urgent) विशेष टोकन शुल्क तत्काल वापस किया जाए, और मानसिक, आर्थिक व समय की क्षति के लिए पेनल्टी/क्षतिपूर्ति सहित रिफंड दिया जाए।
इस पूरे प्रकरण को अन्ना टीम जींद द्वारा औपचारिक रूप से Haryana Chief Minister’s Office ईमेल
को भेज दिया गया है।
साथ ही अन्ना टीम ने राज्य सरकार से मांग की है कि—
- हड़ताल के दौरान नागरिक सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए राज्य स्तर पर स्पष्ट नीति बनाई जाए,
- और एनआरआई नागरिकों के लिए तकनीक आधारित विशेष पंजीकरण व्यवस्था तत्काल लागू की जाए।
अन्ना टीम का कहना है कि यदि रीतू ढांडा जैसे मामलों में उदाहरणात्मक समाधान नहीं किया गया, तो यह साफ हो जाएगा कि हरियाणा में आम नागरिक के लिए न तो हड़ताल के समय कोई सुरक्षा तंत्र है और न ही तकनीकी युग में प्रशासन नागरिक-अनुकूल बनने के लिए तैयार है।
यह प्रकरण जींद नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा की व्यवस्था पर गंभीर चेतावनी है।